जानिए यतीमों के पिता कहे जाने वाले अली गामदी के बारे में,जिन्होंने हजारों यतीमो को दिया आसरा…

अली गामदी सऊदी नागरिक हैं , एक गरीब परिवार में जन्म लिया , होनहार थे मेहनत की अच्छी शिक्षा पाई और एक एविएशन एकेडमी में पायलटों को ट्रेनिंग देने के काम में लग गए अच्छी नौकरी अच्छी तनख्वाह , शादी कर ली जिंदगी अच्छी गुजरने लगी ।

लेकिन शादी के कई वर्ष बीत गए कोई औलाद नहीं हुई मियां बीवी परेशान हुए दवा इलाज के बाद फैसला किया कि किसी बच्चे को गोद ले लेते हैं इसके साथ साथ ही फैसला किया कि वह बच्चा सऊदी न हो बल्कि किसी दूसरे देश का हो ।

दोनों मियां बीवी ने फिलिपींस का सफर किया कई बच्चों को देखा लेकिन यहां आ कर अचंभे में पड़ गए वह एक बच्चे को गोद लेना चाहते थे।यहां दर्जनों ऐसे बच्चे थे जिन्हें सहारे की जरूरत थी वह यतीम थे मां बाप में से किसी एक का या दोनों का देहांत हो गया था।

वह दोनों ही बड़े परेशान हुए और फैसला किया कि एक बच्चे को गोद लेने के बजाए एक यतीम खाना खोला जाए जिसमें ज्यादा बच्चे रहें उनकी परवरिश हो और उनकी शिक्षा का प्रबंधन हो।

इस तरह अली गामदी जो किसी एक बच्चे को गोद लेना चाहते थे दर्जनों बच्चों को गोद ले लिया , फिलिपींस , हांगकांग मलेशिया , इथोपिया इरतेरिया किनिया जैसे 28 देशों में यह मियां बीवी यतीम खाने खोलते गए पैसे की परेशानी हुई घर बेच दिया बैंक से कर्ज लेते किस्तें जमा होती दूसरा कर्ज ले लेते इस तरह अपने काम में लगे रहे लोगों ने काम करते देखा मदद को आगे बढ़े।

पिछले 17-18 वर्षों से इस काम में लगे हुए हैं अभी तक 7000 बच्चों की परवरिश कर चुके हैं फिलहाल 1200 यतीम बच्चों व 2000 परिवारों को गोद लिया हुआ है कई स्कूल व चार कालेज चला रहे हैं।

अल्लाह का करम इसके बाद इन के यहां चार बच्चे पैदा हुए दो बेटे व दो बेटियां बड़े बच्चे का नाम फारिस है वह भी अपने वालिद का हाथ बंटाते हैं।

वह कुवैती नागरिक डाक्टर अब्दुर्रहमान अल सुमैइत को अपना आईडल मानते हैं

हज़रत अली रज़िल्लाह अनहो को दुनिया अबुल ऐताम ( ابوالايتام ) कहती थी क्योंकि वह यतीमों की देख भाल करते थे यह अली भी अबुल ऐताम ( ابوالايتام ) के नाम से मशहूर हैं शायद हज़रत अली रज़िल्लाह अनहो के नाम की ही बरकत है।

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