मुसलमान के साथ मायूसी अच्छी नहीं लगती, पढ़िए खुर्शीद अहमद की इंकलाबी पोस्ट …

यह एक हक़ीक़त है कि भारत में मुसलमानों को खत्म नहीं किया जा सकता , और मौलाना आज़ाद व दूसरे उल्मा की दूरअंदेशी थी कि यहां मुसलमानों की इतनी बड़ी संख्या है कि इन्हें ग़ुलाम व दास भी नहीं बनाया जा सकता है

भारत न उंदुलस बन सकता है न म्यांमार , और न भारतीय मुसलमानों का अंजाम जर्मनी के यहूदियों वाला हो सकता है इस के बहुत से कारण हैं और शायद सबसे बड़ा कारण हमारा 25 करोड़ होना है इतनी बड़ी संख्या पर काबू पाना नामुमकिन है

इस बात को हम से अधिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समझती है इस लिए उस की पूरी कोशिश है कि हमें छठे दर्जे का नागरिक बना दिया जाय पांचवें दर्जे पर आदिवासी और चौथे दर्जे पर दलित से भी नीचे

सरकार अपने संसाधनों के साथ इसी पर मेहनत कर रही है वह मुसलमानों की हिम्मत तोड़ना चाहती है उसकी पूरी कोशिश इस पर है कि मुसलमान खुद स्वीकार कर लें कि वह दलितों से अधिक पिछड़े हैं

लेकिन यह इतना आसान नहीं है मुस्लमान धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर इतने मजबूत हैं कि उनसे यह स्वीकार कराना बहुत मुश्किल है यहां तो हालत यह है कि नफरती से नफरती संघी भी मुसलमान जैसा रहना चाहता है उनके जैसा खाना खाना चाहता है वह पनीर भी खाएगा तो शाही पनीर वह सोयाबीन के कबाब बनाएगा तो शामी कबाब के नाम से तमाम नफरतों के बाद भी पाकिस्तानी ड्रामे उसे अच्छे लगते हैं उर्दू शायरी का मोह छोड़ नहीं पाता

यह सिर्फ खाने पीने ड्रामे व शायरी तक का मामला नहीं है बल्कि जिंदगी के हर क्षेत्र में वह मुसलमानों से प्रभावित है या उनकी जरूरत महसूस करता है

तमाम रोक परेशानी के बावजूद मुसलमानों ने शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत तरक्की की है प्रति व्यक्ति आय में मुसलमान दलित आदिवासी ही नहीं अधिक तर ओबीसी जातियों से आगे हैं

आज ही सी मंडल ने एक पोस्ट की थी जिसमें औसत आयु पर एक रिपोर्ट थी उस रिपोर्ट के अनुसार औसत आयु में भी मुस्लमान अपर कास्ट हिंदुओं के बाद दूसरे नंबर पर हैं बाकी सब लोगों से कहीं बेहतर यानी स्वास्थ्य में भी मुसलमानों की पोजीशन अच्छी है

इस लिए मुसलमानों पर दबाव रहेगा परेशानियां हैं और बढ़ भी सकती हैं पर बहुत बड़े ख़तरे की बात पेश नहीं आयेगी इंशाल्लाह

बस उसे उन मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बचना होगा जो हीनभावना से ग्रस्त हैं और उठते बैठते मुसलमानों को दलितों से बदतर हालात में बताते हैं यह समझ लिजिए कि यह लोग जाने अंजाने में संघ के एजेंट का काम कर रहे हैं

 

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