जलीला हैदर:अपने लोगों के लिए ‘आयरन लेडी ऑफ बलूचिस्तान’ तो अमेरिका के लिए ‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ कवरेज’

इस धरती पर जब जब अंतरास्ट्रीय दिवस के मौके पर दुनीयभर में जलसे होंगे तभी कई मुल्कों में औरतों के हुकुल के लिए नारे लगाए जाएंगे।

इस धरती की सबसे खूबसूरत जगहों में एक क्वेटा, पाकिस्तान में 10 दिसम्बर 1988 में जलीला में पैदा हुई। वह जिस समुदायसे आती है उसके साथ हमेशा ही पाकिस्तान में दोयम दर्जे के नागरिक से सुलूल किया जाता है। फिर तालिबान के उभार और इस समुदाय के प्रति उसके नफरतो रवैया ने क्वेटा ने कभी राहत की सास नही ली।

ऐसे में जलीला को बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी का सफर करना कितना ज्यादा मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। उन्हें न केवल बहुसंख्यक समुदाय के भेदभाव और उसकी हिकारत का सामना करना पडा।

अपने तबके के रूढ़िवादी की फब्तियां और धमकियां झेलनी भी पड़ी। लेकिन माता और पिता अपनी बेटी के पीछे लगातारजबूती से खड़े रहे और जलीला ने कभी उन्हें मायूस नही किया। वह पढ़ती गई और बढ़ती गई।

जलीला ने बहुत कम किया है। उसी को देखते हुए बीबीसी ने उन्हें साल 2019 में दुनिया की 100 प्रतिभाशाली महिलाओ में शामिल किया।अमेरिका विदेश मंत्रालय ने साल 2020 में उन्हें इंटरनेशनल वुमन ऑफ कवरेज अवर्ड से नवाजा। अब तो काफी लोग उन्हें आयरन लेडी ऑफ बलूचिस्तान कहते है।

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