प्यारे नबी (स.अ.व.) ने इरशाद फरमाया, “फातिमा मेरे गोश्त का एक टुकड़ा है तो जिसने उसे नाराज़ किया उसने” ….

हज़रत फातिमा ज़ुहरा
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खातूने जन्नत हज़रत फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

ⓩ आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत मुजद्दिदे दीनो मिल्लत इमाम इश्को मुहब्बत सय्यदना इमाम अहमद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु जिनकी शाने अक़्दस में फरमाते हैं*

उस बुतूले जिगर पार-ए मुस्तफा
मजला आरा-ए इफ्फत पे लाखों सलाम

जिसका आंचल ना देखा मा ओ महर ने
उस रिदाए नज़ाहत पे लाखों सलाम

सय्यदा ज़ाहिरा तय्यबा ताहिरा
जाने अहमद की राहत पे लाखों सलाम

नाम —– हज़रत फातिमा ज़ुहरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

लक़ब —- ज़ुहरा व बुतूल

वालिद — रसूल अल्लाह सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम

वालिदा — हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा

विलादत – ऐलाने नुबुव्वत से 1 साल क़ब्ल

शौहर — मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

निकाह — 17 रजब,पीर,2 हिजरी

औलाद — (6) हज़रत इमाम हसन,हज़रत इमाम हुसैन,हज़रत मोहसिन,हज़रत ज़ैनब,हज़रत कुलसुम,हज़रत रुक़य्या रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन

विसाल — 3 रमज़ान,मंगल,11 हिजरी

ⓩ आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के फज़ाइलो मनाक़िब बेशुमार हैं तहरीर में नहीं आ सकते मगर हुसूले बरकत के लिए चन्द का ज़िक्र करता हूँ*

आप नबीये पाक की सबसे छोटी साहबज़ादी हैं,नबीये पाक सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम को आपसे बेहद्द मुहब्बत थी,आपके आने पर नबी करीम सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फौरन खड़े हो जाते आपकी पेशानी चूमकर अपनी मसनद पर बिठाते

उम्मुल मोमेनीन सय्यदना आईशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं कि मैंने उठने बैठने चाल ढाल और बर्ताव में फातिमा से बढ़कर हुज़ूर के मुशाबह किसी को नहीं देखा

मशहूर है कि आप की रूह क़ब्ज़ करने के लिए हज़रत इस्राईल अलैहिस्सलाम नहीं आये बल्कि खुद रब्बे ज़ुलजलाल के हुक्म से आपकी रूह क़ब्ज़ हुई

आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा कभी नमाज़ के क़याम में ही होतीं और रात गुज़र जाती कभी रुकू में और कभी एक ही सजदे में सारी रात निकल जाती आप रज़ियल्लाहु तआला अन्हा फरमाती हैं ऐ मौला तूने कैसे छोटी छोटी रातें बनायीं है कि फातिमा दिल खोलकर इबादत भी नहीं कर पाती

आप एक ही वक़्त में हाथों से आता गूंधतीं ज़बान से क़ुरआन पढ़तीं दिल में उसकी तफसीर करतीं पैरों से हसनैन का झूला झूलातीं और आंखों से खुदा की याद में रोतीं

📕 मदारेजुन नुबुव्वत,जिल्द 2,सफह 127-787-788
📕 सच्ची हिक़ायत,सफह 325
📕 ज़रक़ानी,जिल्द 3,सफह 200
📕 शरह सलामे रज़ा,सफह 459

हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि फातिमा मेरे गोश्त का एक टुकड़ा है तो जिसने उसे नाराज़ किया उसने मुझे नाराज़ किया और जिसने उसे तकलीफ दी उसने मुझे तकलीफ दी (इसी लिए आपके निकाह में रहते हुए हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने मौला अली पर दूसरा निकाह हराम फरमा दिया था)

📕 मिश्कात,सफह 568

जिस तरह हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु जन्नती जवानों के सरदार हैं उसी तरह हज़रते फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा तमाम जन्नती खवातीनों की सरदार हैं

📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 532

एक मर्तबा मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से पूछा कि आप किसको ज़्यादा महबूब रखते हैं मुझे या फातिमा को तो आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि बेशक फातिमा मुझे तुमसे ज़्यादा महबूब है और तुम मेरे नज़दीक उनसे ज़्यादा इज़्ज़त वाले हो

📕 अशरफुल मोअब्बद,सफह 53

आप इंसानी शक्ल में हूर थीं इसी लिए आपको कभी हैज़ नहीं आया और बच्चा होने के बाद फौरन आप निफास से पाक हो जाती थीं इसी लिए आपका लक़ब ज़ुहरा हुआ

📕 बरकाते आले रसूल,सफह 123

आपके विसाल से पहले आपने हज़रत अस्मा बिन्त क़ैस जो कि हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बीवी हैं उनसे फरमाया कि मर्दों की तरह औरतों का जनाज़ा ले जाना मुझे पसंद नहीं,तो आपके लिए एक लकड़ी का गहवारा बनाया गया और उस पर पर्दा डालकर आपको दिखाया गया जिसे देखकर आप बहुत खुश हुईं

📕 खुत्बाते मुहर्रम,सफह 305

ⓩ जो लोग हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ व हज़रत उमर फारूक़े आज़म रिज़वानुल्लाहि तआला अलैहिम अजमईन पर ये ऐतराज़ करते हैं कि उन्होंने मौला अली की खिलाफत ग़सब कर ली और अहले बैते अतहार को सताया मआज़ अल्लाह,उन्हें जानना चाहिए कि खुद मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपनी एक बेटी हज़रत कुलसुम का निकाह हज़रते उमर फारूक़े आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से किया,क्या दुनिया का कोई बाप अपने दुश्मन से अपनी बेटी का निकाह करेगा हरगिज़ नहीं तो मानना पड़ेगा कि उनके दर्मियान कभी कोई ना इत्तेफाक़ी नहीं रही

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