मिलिए डॉ हामिद चोई से, बने पहले कोरियाई मुसलमान जिन्होंने कुरआन पाक का किया कोरियाई भाषा में अनुवाद

मुस्लिम समाज की सबसे पाक किताब क़ुरआन शरीफ है। जिसे अल्लाह ताला ने रमजान के पाक महिनी में नाजिल किया था। इस क़ुरआन शरीफ को सभी मुस्लिम पढ़ते है। इसका अब हिंदी तर्जुमा, उर्दू तर्जुमा भी आने लगा है। हाल ही में हामिद चोई ने क़ुरआ न शरीफ

और सहीह बुखारी शरीफ का कोरियाई में अनुवाद तर्जुमा किया है। वह इसे करने वाले पहले कोरियो मुस्लिम बन गए है। मीडिया रिपोर्टज़ के मुताबिक बता दे कि इस ट्रांसलेशन प्रोजेक्ट में लगभग 7 साल लगे है।

वर्तमान में अलका वह दक्षिण कोरिया के एक यूनिवर्सिटी में लेक्चरक इन इस्लामिल स्टडीज और अरबी के लेक्चरर के रूप में भी कम किया है।

यह तर्जुमा ऐसे वक्त आया है जब दक्षिण कोरिया के मुसलमानो की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही है। हालांकि यह एक माइनॉरिटी धर्म है ।

कोरियाई मुस्लिम संघ के एक अनुमान के मुताबिक बता दे कि वतर्मान में मुस्लिमो की संख्या लगभग 200,000 है जो कुल जनसंख्या का केवल 0.38% है। डॉक्टर कोई ने अपनी शिक्षा सऊदी अरब के मदीना के इस्लामिक विश्विद्यालय में प्राप्त की थी।

चोई ने कोरियाई और शहै बुखरी में जिन कार्यो का ट्रांसलेशन किया है वह सभी उनके वैज्ञानिक कार्यो का हिस्सा है। उन्होमे 90 से ज्यादा पुस्तके भी लिखी है।

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