पिता के मौत के बाद रहने के लिए एक झोपड़ी बची थी, माँ ने मजदूरी करके पढ़ाया और बेटा बना IAS अधिकारी….

जिंदगी में कठिनाई आती रहती है लेकिन जीवन में आने वाली कठिनाइयों से निराश होकर बैठना नहीं चाहिए बल्कि उसका सामना करके डटे रहना चाहिए।

मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंख होने से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है इस बात को सच कर दिखाया डॉक्टर राजेंद्र भरूद ने।

डॉक्टर राजेन्द्र बताते है कि उनके परिवार की स्थिति ऐसी थी कि उनकी स्वर्गवासी पिता की फ़ोटो खिंचने के लिए पैसे नही थे।

एक दिन में उनके परिवार की स्थिति औसतन 100 रुपए की आमदनी होती थी।

इन्ही पेसो के घर पर सामान, शिक्षा और शराब बनाने के लिए खर्च किया जाता है। राजेन्द्र और उनकी बहन के एक साथ गांव के जिला परिषद स्कूल में पढ़ाई की।

उन्होंने इसी तरह अपने सफर को।पूरा किया और IAS बनकर आपने माता के सपने को।पूरा किया है। उनके पिता की पहले ही मौत हो चुके थी।

Leave a Comment