इंडिया में इनसे बड़ा मुसलमान कभी पैदा नहीं हुआ

आज ही के दिन 27 मार्च 1898 यानी आज से 124 साल क़ब्ल 80 साल की उम्र में सयैद अहमद तक़वी बिन सय्यद मुहम्मद मुत्तक़ी की वफ़ात हुई थी।

आप एक फ़लसफ़ी और समाज सुधारक थे. आप को लोग सर सैयद अहमद खान के नाम से जानते है. सर सैयद अहमद खान गजल, नज्म काफी ज्यादा लिखने के शौकीन थे।

मदरसा के मज़हबीकरण के बाद दुनियावी तालीमी इदारा का होना भी ज़रूरी था और उस कमी को सर सैयद अहमद खां ने मुकम्मल किया. सर सैयद अहमद ख़ान ने मुसलमानाने हिंद को तालीम के क्षेत्र में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसा तोहफ़ा देकर जो क़ाबिल-ए-तारीफ़ काम किया है बेशक़ अब तक उस का कोई सानी नहीं ‘है तो बताइए? हालांकि दीनी ऐतबार से उन का जो नज़रिया था मैं उसका कायल नहीं।

सर सैयद अहमद खां ने 1875 ईस्वी में मदरसातुल मुसलमानान-ए-हिंद के रूप में में एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की जिस ने 1920 ईस्वी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रूप लिया.

1921 ईस्वी में भारतीय संसद के एक अधिनियम के माध्यम से इसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया.

आज उनकी दी हुई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कई मुस्लिम तालिबा अपनी पढ़ाई को पूरा करते है और अपना साथ ही अपने वालिदैन का नाम।रोशन करते है।

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